हिन्दी टाइपिंग अभ्यास पैसेज
यूनिकोड देवनागरी में 16 मौलिक हिन्दी पैसेज (कुल 1,754 शब्द), जो TypeTez के लिए लिखे गए हैं: रोज़मर्रा के दृश्य, एक औपचारिक पत्र, सलाह और एक नुक़्ता अभ्यास।
वर्तनी संबंधी बातें: ज़्यादातर पैसेज सब्जी और रोज जैसे दूसरी भाषाओं से आए शब्दों को नुक़्ते के बिंदु के बिना लिखते हैं; hi-03 एक नुक़्ता अभ्यास है जिसमें बिंदु ज़रूरी है। किसी भी पैसेज में अंक, स्वर ऑ या अंग्रेज़ी कोलन का उपयोग नहीं है। इनका हर कैरेक्टर Microsoft के Hindi Traditional (Inscript) लेआउट की अक्षर या संख्या वाली कुंजियों पर, अकेले या Shift के साथ, मौजूद है, इसलिए आपको AltGr कुंजी की कभी ज़रूरत नहीं पड़ती। वाक्यों के अंत में पूर्ण विराम । आता है। विराम चिह्न हमेशा किसी शब्द से जुड़े होते हैं, स्पेस के बीच अलग से कभी टाइप नहीं होते, इसलिए कोई चिह्न छोड़ देना छूटा हुआ शब्द नहीं, बल्कि विराम चिह्न की चूक गिना जाता है।
स्रोत: Hindi Traditional Keyboard, Microsoft Learn। 26 अक्टूबर 2026 को जाँचा गया।
hi-01 सुबह की सैर
सुबह की सैर दिन की सबसे शांत शुरुआत होती है। जब मोहल्ला अभी सो रहा होता है, तब पार्क में कुछ लोग धीरे-धीरे चलते दिखाई देते हैं। हवा में हल्की ठंडक होती है और पेड़ों पर चिड़ियाँ चहचहाती रहती हैं। कोई तेजी से चक्कर लगाता है, तो कोई बेंच पर बैठकर गहरी साँसें लेता है। बुजुर्गों का एक समूह रोज एक ही कोने में मिलता है और दिनभर की योजनाओं पर बातें करता है। लौटते समय सब्जी वाले अपनी गाड़ियाँ सजा रहे होते हैं और चाय की दुकान से भाप उठ रही होती है। सैर से लौटकर मन हल्का लगता है और पूरा दिन अधिक व्यवस्थित ढंग से बीतता है।
hi-02 बारिश का पहला दिन
इस साल की पहली बारिश दोपहर बाद अचानक शुरू हुई। सुबह से ही आसमान में बादल घिरे थे और हवा भारी लग रही थी। जैसे ही पहली बूँदें गिरीं, सूखी मिट्टी से एक सोंधी खुशबू उठी। बच्चे दौड़कर आँगन में आ गए और कागज की नावें बनाने लगे। सड़क के किनारे पानी की छोटी-छोटी धाराएँ बहने लगीं। दुकानदारों ने जल्दी-जल्दी अपना सामान ढक दिया और राहगीर पेड़ों के नीचे खड़े हो गए। कुछ देर बाद बारिश धीमी हुई तो पूरा मोहल्ला धुला-धुला और नया दिखने लगा। शाम को छतों पर लोग चाय के कप लेकर बैठे थे और सब एक ही बात कह रहे थे कि गर्मी से आखिरकार राहत मिली।
hi-03 नुक़्ता अभ्यास: दफ़्तर का एक दिन
दफ़्तर में हर दिन कई ज़रूरी काम एक साथ सामने आते हैं। सुबह आते ही सबसे पहले उन फ़ाइलों को अलग कर लेना चाहिए जिन पर उसी दिन फ़ैसला होना है। कई बार हम ईमेल खोलकर बैठ जाते हैं और असली काम पीछे छूट जाता है। बेहतर है कि ईमेल देखने के लिए दिन में दो-तीन तय समय रखे जाएँ। किसी भी काग़ज़ पर दस्तख़त करने से पहले उसे ध्यान से पढ़ना ज़रूरी है। अगर कोई बात साफ़ न हो, तो संबंधित सहकर्मी से उसी समय पूछ लेना ठीक रहता है। शाम को जाने से पहले अगले दिन के कामों की छोटी सूची बना लें। इससे सुबह का समय सोचने में नहीं, काम करने में लगता है।
hi-04 पुस्तकालय की एक दोपहर
हमारे मोहल्ले का पुस्तकालय एक पुरानी इमारत की पहली मंजिल पर है। अंदर लकड़ी की ऊँची अलमारियाँ हैं, जिनमें किताबें करीने से लगी रहती हैं। दोपहर के समय वहाँ गहरी शांति रहती है। विद्यार्थी लंबी मेज के चारों ओर बैठकर पढ़ते हैं और केवल पन्ने पलटने की आवाज सुनाई देती है। पुस्तकालय की देखरेख करने वाली दीदी हर सदस्य को नाम से पहचानती हैं। वे किताब देते समय एक रजिस्टर में तारीख लिखती हैं और मुस्कुराकर समय पर लौटाने की याद दिलाती हैं। कोने में बच्चों के लिए चित्रों वाली किताबें रखी हैं और एक दरी बिछी है। यहाँ आकर लगता है कि भागती हुई दुनिया कुछ देर के लिए ठहर गई है।
hi-05 अवकाश के लिए प्रार्थना-पत्र
सेवा में, प्रधानाचार्य महोदय, नवीन विद्यालय। तीन दिन के अवकाश के लिए प्रार्थना-पत्र। महोदय, सविनय निवेदन है कि मेरी बड़ी बहन का विवाह अगले सप्ताह होना तय हुआ है। विवाह की तैयारियों और पारिवारिक कार्यक्रमों के कारण मैं सोमवार से बुधवार तक विद्यालय आने में असमर्थ रहूँगा। इन दिनों में जो पाठ पढ़ाए जाएँगे, उन्हें मैं अपने सहपाठियों की सहायता से पूरा कर लूँगा। अतः आपसे निवेदन है कि मुझे तीन दिन का अवकाश देने की कृपा करें। धन्यवाद। आपका आज्ञाकारी शिष्य, अमित कुमार, कक्षा दसवीं।
hi-06 रसोई में माँ की मदद
रविवार की सुबह मैंने तय किया कि आज रसोई में माँ की मदद करूँगा। माँ ने मुस्कुराते हुए मुझे प्याज और टमाटर काटने का काम दिया। पहले तो प्याज काटते समय आँखों से पानी बहने लगा, पर धीरे-धीरे हाथ सधने लगा। फिर माँ ने बताया कि दाल को पकाने से पहले अच्छी तरह धोना क्यों जरूरी है। जब कड़ाही में जीरा चटकने लगा, तो पूरी रसोई में खुशबू फैल गई। मैंने आटा गूँधने की भी कोशिश की, लेकिन पहली बार में वह बहुत गीला हो गया। माँ ने थोड़ा सूखा आटा मिलाकर उसे ठीक कर दिया। उस दिन खाना बनने में देर जरूर हुई, पर सबने कहा कि खाने का स्वाद पहले से ज्यादा अच्छा था।
hi-07 गाँव का मेला
हर साल फसल कटने के बाद हमारे गाँव में एक बड़ा मेला लगता है। मेले से कई दिन पहले ही तैयारियाँ शुरू हो जाती हैं। मैदान की सफाई होती है, दुकानों के लिए जगह बाँटी जाती है और चारों ओर रंग-बिरंगी झंडियाँ लगाई जाती हैं। मेले के दिन सुबह से ही आसपास के गाँवों के लोग बैलगाड़ियों, साइकिलों और पैदल पहुँचने लगते हैं। कहीं मिट्टी के खिलौने बिकते हैं, तो कहीं गरम जलेबियाँ तली जाती हैं। बच्चों की सबसे बड़ी खुशी झूला होता है, जिसके सामने लंबी कतार लगी रहती है। बड़े लोग पुराने दोस्तों से मिलते हैं और घर-परिवार का हाल पूछते हैं। शाम ढलते-ढलते सब थककर लौटते हैं, पर अगले साल के मेले की बातें रास्ते भर चलती रहती हैं।
hi-08 बचत की छोटी आदतें
बचत का अर्थ केवल बड़ी रकम जमा करना नहीं है। रोजमर्रा की छोटी आदतें भी धीरे-धीरे बड़ा अंतर पैदा करती हैं। महीने की शुरुआत में ही एक छोटी रकम अलग रख देना एक अच्छा तरीका है, ताकि खर्च से पहले बचत हो जाए। बाजार जाने से पहले जरूरी चीजों की सूची बना लेने से अनावश्यक खरीदारी कम होती है। बिजली के बल्ब और पंखे जरूरत न होने पर बंद कर देने चाहिए। कुछ लोग एक महीने तक हर खर्च एक डायरी में लिखते हैं और फिर देखते हैं कि पैसा कहाँ जा रहा है। इसका उद्देश्य हर इच्छा को रोकना नहीं, बल्कि सोच-समझकर खर्च करना है।
hi-09 रेल यात्रा
रेल यात्रा का अपना ही आनंद है। स्टेशन पर पहुँचते ही चहल-पहल का एक अलग संसार दिखाई देता है। कुली सामान उठाए दौड़ते हैं, चाय वाले आवाज लगाते हैं और घोषणाएँ लगातार होती रहती हैं। गाड़ी चलने पर खिड़की से बाहर खेत, नदियाँ और छोटे-छोटे गाँव पीछे छूटते जाते हैं। डिब्बे में बैठे अनजान लोग कुछ ही घंटों में एक-दूसरे से घुलमिल जाते हैं। कोई अपने घर का बना खाना बाँटता है, तो कोई बच्चों को कहानी सुनाता है। छोटे स्टेशनों पर गाड़ी कुछ पल रुकती है और फिर सीटी देकर आगे बढ़ जाती है। यात्रा के अंत में जब हम अपने गंतव्य पर उतरते हैं, तो मन में कई नई यादें साथ होती हैं।
hi-10 पेड़ लगाने का दिन
पिछले रविवार हमारे मोहल्ले के लोगों ने मिलकर पेड़ लगाने का कार्यक्रम रखा। सुबह सात बजे सब लोग पार्क के पास इकट्ठा हुए। बच्चों के हाथों में छोटे-छोटे पौधे थे और बड़ों के पास फावड़े और पानी की बाल्टियाँ। पहले जमीन में गड्ढे खोदे गए, फिर उनमें पौधे सावधानी से लगाए गए। हर पौधे के पास एक छोटी तख्ती लगाई गई, जिस पर उसकी देखभाल करने वाले परिवार का नाम लिखा था। तय हुआ कि गर्मियों में हर परिवार अपने पौधे को नियमित पानी देगा। कार्यक्रम के बाद सबने साथ बैठकर नाश्ता किया। उस दिन सबको लगा कि छोटे-छोटे प्रयास मिलकर बड़ा बदलाव ला सकते हैं।
hi-11 नई साइकिल
जन्मदिन पर मुझे एक नई साइकिल मिली। उसका रंग गहरा नीला था और घंटी की आवाज बहुत साफ थी। पहले दिन मैं उसे चलाने से ज्यादा देखता ही रहा। अगली सुबह पिताजी ने मुझे पास के मैदान में ले जाकर संतुलन बनाना सिखाया। कई बार मैं गिरते-गिरते बचा और एक बार घुटने पर हल्की खरोंच भी आई। पिताजी ने समझाया कि सामने देखते रहो और पैडल लगातार चलाते रहो। तीसरे दिन मैं बिना सहारे के पूरा चक्कर लगा आया। उस दिन की खुशी आज भी याद है। अब मैं रोज शाम को साइकिल साफ करता हूँ और उसके पहियों की हवा जाँचता हूँ।
hi-12 परीक्षा से पहले की रात
परीक्षा से पहले की रात अक्सर सबसे लंबी लगती है। मेज पर किताबें फैली होती हैं और मन करता है कि सब कुछ एक बार फिर पढ़ लिया जाए। ऐसे समय में नया पाठ शुरू करने के बजाय अपने बनाए छोटे नोट्स दोहराना अधिक उपयोगी रहता है। सूत्र, परिभाषाएँ और महत्वपूर्ण तिथियाँ एक बार बोलकर दोहराने से वे याद रहती हैं। प्रवेश पत्र, पेन, पेंसिल और पानी की बोतल रात में ही बैग में रख लेनी चाहिए, ताकि सुबह कोई हड़बड़ी न हो। देर रात तक जागने से अगले दिन थकान रहती है, इसलिए समय पर सो जाना समझदारी है। सुबह शांत मन से घर से निकलें और भरोसा रखें कि आपकी मेहनत आपके साथ है।
hi-13 मोहल्ले की दुकान
हमारे मोहल्ले के कोने पर शर्मा जी की छोटी-सी किराने की दुकान है। दुकान छोटी है, पर वहाँ जरूरत की लगभग हर चीज मिल जाती है। शर्मा जी सुबह जल्दी दुकान खोलते हैं और रात को देर से बंद करते हैं। वे हर ग्राहक को नाम से बुलाते हैं और बच्चों को मीठी गोलियाँ देना कभी नहीं भूलते। कोई सामान खत्म हो जाए, तो वे उसे अगले दिन मँगाकर रख देते हैं। मोहल्ले के बुजुर्ग अक्सर उनकी दुकान के बाहर बेंच पर बैठकर बातें करते हैं। बड़े बाजारों के इस दौर में भी उनकी दुकान पर भीड़ कम नहीं होती, क्योंकि वहाँ सामान के साथ अपनापन भी मिलता है।
hi-14 पत्र लिखने की कला
आज भले ही संदेश पल भर में पहुँच जाते हैं, पर हाथ से लिखे पत्र का अपना महत्व है। पत्र लिखते समय हम अपने विचारों को धीरे-धीरे शब्दों में ढालते हैं। अच्छा पत्र सरल भाषा में होता है और उसमें बात साफ-साफ कही जाती है। शुरुआत में स्थान और तारीख लिखनी चाहिए, फिर उचित संबोधन। पत्र के मुख्य भाग में अपनी बात क्रम से रखें और अंत में आदर या स्नेह के साथ विदा लें। पत्र पूरा होने पर उसे एक बार ध्यान से पढ़ना जरूरी है, ताकि कोई गलती न रह जाए। जिसे पत्र मिलता है, वह उसे बार-बार पढ़ता है और कई बार वर्षों तक सँभालकर रखता है।
hi-15 पानी बचाने के घरेलू उपाय
पानी बचाना कोई कठिन काम नहीं है, बस कुछ आदतें बदलनी होती हैं। दाँत साफ करते समय नल खुला न छोड़ें और केवल कुल्ला करते समय ही पानी का उपयोग करें। टपकते नल को जल्द से जल्द ठीक कराएँ, क्योंकि टपकना दिन-रात चलता रहता है। सब्जियाँ धोने के बाद बचे पानी को गमलों में डाला जा सकता है। कपड़े धोने की मशीन तभी चलाएँ जब कपड़े पूरे हों। नहाते समय बाल्टी का उपयोग करें और उसमें उतना ही पानी भरें जितना आवश्यक हो। छत की टंकी पर नजर रखें, ताकि वह भरकर बहने न लगे। ये छोटे कदम मिलकर बड़ी बचत करते हैं।
hi-16 त्योहार की तैयारी
त्योहार से कई दिन पहले ही घर में तैयारियाँ शुरू हो जाती हैं। सबसे पहले पूरे घर की सफाई होती है। अलमारियों से पुराना सामान निकाला जाता है और जो काम का नहीं होता, उसे जरूरतमंदों को दे दिया जाता है। फिर दीवारों पर नई सजावट होती है और दरवाजों पर तोरण लगाए जाते हैं। रसोई से रोज किसी न किसी पकवान की खुशबू आती है। बच्चे बाजार जाकर रंग-बिरंगी रोशनी और सजावट का सामान चुनते हैं। त्योहार के दिन रिश्तेदार और पड़ोसी एक-दूसरे के घर मिठाई लेकर जाते हैं। इस भागदौड़ में थकान तो होती है, पर सबके साथ मिलकर काम करने का आनंद उस थकान को भुला देता है।